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Vihar Seva Group

About Vihar Seva Group

विहार सेवा ग्रुप (VSG) देशभर में समर्पित जैन युवाओं का एक सेवाभावी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य जैन साधु-साध्वी भगवंतों के सुरक्षित, निर्भय एवं निर्विघ्न पदविहार को सुनिश्चित करना है।

2009 में पूज्य आचार्य श्री महाबोधि सूरीश्वर जी महाराज साहेब की प्रेरणा से भिवंडी में मात्र 90 युवाओं से शुरू हुई यह सेवा आज एक विशाल राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है। आज हजारों विहार सेवक देश के विभिन्न राज्यों और सैकड़ों नगरों एवं गांवों में गुरु भगवंतों के विहार में सुरक्षा एवं सेवा प्रदान कर रहे हैं।

विहार सेवा केवल सड़क पर सुरक्षा देने तक सीमित नहीं है। मार्ग व्यवस्था, हाईवे सुरक्षा, उपधि का सुरक्षित वहन, गोचरी एवं ठहरने की व्यवस्था, चिकित्सा सहायता तथा आवश्यकता के समय हर संभव सहयोग प्रदान करना भी इस सेवा का अभिन्न अंग है।

इस सेवा का सबसे बड़ा संदेश है एकता। सड़क पर संप्रदाय, पंथ और मतभेद पीछे छूट जाते हैं—श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी या तेरापंथी नहीं, बल्कि हम सब केवल “जैन” हैं और ये हमारे पूज्य गुरु भगवंत हैं।

विहार सेवा ने केवल साधु-साध्वियों की सुरक्षा ही नहीं बढ़ाई, बल्कि हजारों युवाओं के जीवन में धर्म, संयम, सेवा और संस्कार की नई चेतना जगाई है। अनेक युवाओं ने सेवा करते-करते आध्यात्मिक जीवन की ओर कदम बढ़ाए और कुछ ने तो संसार का त्याग कर दीक्षा भी अंगीकार की।

आज 35,000+ विहार सेवक, 1,500+ सक्रिय केंद्र और 14+ राज्यों में फैला यह सेवा परिवार एक ही भावना से कार्यरत है—गुरु भगवंतों को सड़क पर अभय प्रदान करना।

विहार सेवा हमारे लिए केवल सेवा नहीं, बल्कि गुरु भगवंतों के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत स्वरूप है।

हमारा संकल्प

“कोई भी साधु-साध्वी भगवंत अकेले विहार न करें।” 

About the Vihar Seva

विक्रम संवत २०६५ का हमारा चातुर्मास भिवंडी में हुआ था। चातुर्मास पूर्ण होने के बाद हम भिवंडी के ओसवाल पार्क में आए, जहाँ उपधान तप का प्रारंभ हुआ। कार्तिक वद नवमी का दिन था। शीत ऋतु का समय था और सुबह की ठंड के कारण उपाश्रय के सभी दरवाजे बंद करके हम बैठे थे। किंतु प्रातः लगभग ८ बजे एक अत्यंत दुःखद समाचार ने बंद दरवाजों के बावजूद भीतर प्रवेश कर लिया। वह समाचार था—महेसाणा के निकट चार साध्वीजी भगवंतों के हुए भीषण एवं प्राणघातक दुर्घटना का। एक ही परिवार की उन चार साध्वीजी भगवंतों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने दो दिनों तक दिन का चैन और रात की नींद छीन ली।

तीसरे दिन मन कुछ संभलने लगा ही था कि एक बार फिर उसी प्रकार सुबह के समय ऐसे समाचार प्राप्त हुए, जिन्होंने कठोर से कठोर हृदय को भी कंपा दिया। यह समाचार था—विश्वप्रसिद्ध विद्वान पूज्य मुनिराज श्री जंबूविजयजी महाराज के दुर्घटनाग्रस्त होने का। यह समाचार सुनकर हृदय व्याकुल हो उठा। उस समय आँखों में आँसू अवश्य थे, किंतु अंतर्मन में एक प्रज्वलित अग्नि भी धधक उठी थी। मन में विचार आया कि यदि दुर्घटनाओं का यह सिलसिला इसी प्रकार चलता रहा, तो भगवान के शासन की व्यवस्था और संतों की सुरक्षा कैसे बनी रहेगी? अब कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा।

इसी वेदना और चिंता के बीच गुणानुवाद की एक सभा आयोजित हुई। एक ओर जिनशासन के प्रति अटूट श्रद्धा और अनुराग था, तो दूसरी ओर हृदय में पीड़ा और चिंता की अग्नि जल रही थी। इसी भावनात्मक वातावरण में संघ के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न रखे गए। प्रश्न यह था कि जब हमारा पुत्र या पुत्री कॉलेज जाता है, जब हमारे पति कार्यालय जाते हैं अथवा पत्नी अपने मायके जाती है, तब हम बार-बार मोबाइल पर यह जानने का प्रयास करते हैं कि वे कहाँ पहुँचे, कब पहुँचेंगे और सुरक्षित हैं या नहीं।

Blessings & Ashirvachan

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